Graphology.......

क्या है हैंडराइटिंग:-

सबसे पहले तुम्हें समझना चाहिए कि हैंडराइटिंग क्या है? पेन या पेंसिल पकड़कर अक्षर बनाना ही केवल हैंडराइटिंग की परिभाषा नहीं है, बल्कि अलग-अलग इंसान के लिखने की अद्भुत कला को हैंडराइटिंग कहा जाता है और ये कैलिग्राफी और टाइपफेस से अलग होती है। तुम्हें पता है, हर इंसान की अपनी एक हैंडराइटिंग होती है और पूरी दुनिया में किसी भी इंसान की हैंडराइटिंग एक जैसी नहीं है। तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि जुड़वां बच्चों की हैंडराइटिंग भी एकदम अलग होती है। 

लिखावट की स्थापना 6, जनवरी, 1989 में हुई थी | लिखावट लेखकों का एक समूह है जो लेखकों के रचनात्मक सहयोग से चलता है | लेखकों के इस समूह को फिल्म और रंग- समीक्षक अजित राय ने मित्र मंडली कहकर संबोधित किया था, तब से मित्र मंडली की व्याप्ति हो गई | यह मित्र मंडली पिछले 23 सालों से कविता और विचार को लेकर लिखावट के माध्यम से सक्रिय है | कविता और कविता पाठ को हमेशा महत्व दिया है | लिखावट ने पहला कार्यक्रम 6 जनवरी, 1989 को घर-घर कविता के रूप में आयोजित किया था

लिखावट विश्लेषण का परिचय:-

लिपि विज्ञान लिखावट का अध्ययन और विश्लेषण होता है। लेखन या हस्ताक्षर के द्वारा लेखक के लक्षण एवं व्यक्तित्व का विश्लेषण आसानी से किया जा सकता है। लिपिविज्ञान प्रभावी ढंग से एक व्यक्ति के व्यक्तित्व और उसके अद्वितीय लक्षणों को ही प्रकट नही करता बल्कि उसकी ताकत और कमजोरियों का भी ज्ञान कराने में सक्षम होता है। हर किसी के लेखन की एक अनूठी शैली होती है जो एक व्यक्ति के व्यक्तित्व को दर्शाती है। प्रत्येक अक्षर का झुकाव, आकार, चौड़ाई, ऊंचाई, और उसका घुमावदार होना लेखक के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है। 

एक लिपि विशेषज्ञ को लेखक के लेखन का विश्लेषण करने से पहले उसकी आयु, लिंग और राष्ट्रीयता के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ़ होना चाहिए। लेखन एक लेखक की निजी विशिष्टता है। किन्ही दो व्यक्तियों की लिखावट बिल्कुल समान नही हो सकती। लिखावट विश्लेषण का इस्तेमाल फोरेंसिक और जांच प्रयोजनों में, दस्तावेज़ या हस्ताक्षर के सत्यापन के रूप में भी किया जाता है। 

केमिलों बाल्दी, जो एक लेखक हैं और इटली में बोलोन विश्वविद्यालय में चिकित्सा और मनोविज्ञान के प्रोफेसर भी हैं. यह लिखन विश्लेषण के पिता के रूप में जाने जाते हैं। 1622 में, इन्होंने एक पुस्तक प्रकाशित की जो लिखावट के अध्ययन के माध्यम से चरित्र का विश्लेषण करती है। दिलचस्प बात ये है कि 330 ई.पू. में लिखावट के बारे में पहली टिप्पणी सर अरस्तू द्वारा दर्ज की गई थी। उन्होने लिखा है: 

"भाषण विचारों या इच्छाओं की अभिव्यक्ति है। हस्तलिपि भाषण का सुदृश्य रूप है। जिस तरह भाषण भावनाओं की वि्भक्ति होती है, लिखावट लेखक के विचार या विचारों एवं इच्छाओं की अंतर्निहित भावनाओं की अभिव्यक्ति है। 

"रोमन इतिहासकार सुतोनियस ने सम्राट ऑगस्टस की लिखावट का विश्लेषण उसके व्यक्तित्व के लक्षण को जानने के लिये किया। अध्ययन में सुतोनियस का विश्लेषण था कि सम्राट एक भरोसेमंद व्यक्ति नहीं थे क्योकि वे अपने शब्दों को उनके लेखन में अलग नहीं करते थे। सुतोनियस को यह कहते हुए उद्धृत किया गया था "वह अपने शब्दों को अलग नहीं करते है - मुझे उन पर विश्वास नहीं है" 

इतिहास के दौरान, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और कलाकारों ने लिखावट और लेखको के मध्य का संबंध जानने की उत्सुकता जाहिर की और कई लोगों ने अपनी जान तक लगा दी यह प्रक्रिया जानने में कि कैसे विश्लेषण और लेखन की शैली और एक व्यक्ति के व्यक्तित्व के बीच का अंतर खोजा जाए। एक फ्रेंच मनोवैज्ञानिक, पियरे जेनेट ने लिखावट विश्लेषण को "भविष्य के एक विज्ञान" के रूप में प्रदर्शित किया और बताया कि लिखावट अपने आप में “एक प्रिंटआउट की तरह है। यह लेखक की संवेदनशीलता का फिल्म रिकॉर्ड है”। 

1872 मैं, हाईपोलाईट मिकान ने लिपि विज्ञान को उसका नाम देकर लिखावट के तत्वों को मानव के लक्षणो से संबंधित करने के प्रयास किया। 

अगले 200 वर्षों में, अक्षर की औपचारिक प्रणाली के आधार पर विशेष व्यक्तित्व लक्षण का विकास किया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद, लिपि विज्ञान के अध्ययन और इसके बारे में जानने की इच्छा यूरोप में और संयुक्त राज्य अमेरिका में जारी रही। 1929 में, मिल्टन बंकर ने अमेरिकी लिपिविज्ञान विश्लेषण की सोसायटी की स्थापना की जिसमें लिपिविज्ञान का शिक्षण भी शामिल किया। पिछले 20 वर्षो से लिपिविज्ञान का विश्लेषण शिक्षक, चिकित्सक, कानून प्रवर्तन अधिकारियों, बड़े निगमों और एक दूसरे के बारे में अधिक जानने के इच्छुक जोड़ों द्वारा किया जाता रहा था। लिखावट विश्लेषण का उपयोग करने की प्रवृत्ति दिन ब दिन बढ़ती जा रही है और लिपिविज्ञान के विश्लेक्षण के माध्यम से एक दूसरे के बारे में जानने की उत्सुकता भी बढ गयी है। लिखावट विश्लेषण, लेखक के स्वभाव, व्यक्तित्व और चरित्र की उचित एवं सटीक जानकारी प्रदान करता है।

लिखावट से जानिए अपना भविष्य

भविष्य दर्शन में लिखावट का अपना विशेष महत्व है। लिखावट व्यक्तित्व का दर्पण होती है। इससे हम व्यक्ति का रहन-सहन, व्यवहार, विचारधारा आदि जान सकते हैं क्योंकि लिखावट अनजाने में की गई अभिव्यक्ति होती है। समय के साथ-साथ जैसे-जैसे व्यक्ति के विचार, भावनाएं, क्रिया कलाप आदि परिवर्तित होते जाते हैं, उसकी लिखावट भी अपना रूप बदलती जाती है। किंतु अधिक बार लिखावट बदलना उसकी मनःस्थिति के लिए अच्छा नहीं माना जाता। लिखावट सब कुछ बताती है। इसके कुछ विशेष गुण हं- उतार-चढ़ाव, प्रकार, हाशिया, दबाव, गति, शब्दों और पंक्तियों के बीच दूरी आदि।

आइए देखं कि लिखावट से किसी के व्यक्तित्व की पहचान कैसे हो? बनावट: प्रत्येक अक्षर को तीन भागों में देखें। ऊपरी, मध्यम और निचला भाग। ऊपरी भाग से व्यक्ति के विचार, व्यवहार और बुद्धि का पता चलता है। मध्य भाग के अध्ययन से उसके रहन-सहन, आदतों, व्यवहार एवं सामाजिकता का ज्ञान होता है। निचला भाग शारीरिक कामनाओं और इच्छाओं का द्योतक होता है। सीधी लिखावट वाले आत्मविश्वासी, दृढ़ निश्चय, तटस्थ और व्यावहारिक होते हैं। वे संकट में घबराते नहीं। पंक्तियों में उतार हो तो व्यक्ति चिड़चिडा, नकारात्मक सोच वाला और निराशावादी होता है और संकटों में घिरा रहता है। पंक्तियों में उठाव सतत कार्यशील, वैचारिक, मानसिक दृष्टि से स्वस्थ और समाज में प्रतिष्ठित होता है।

लिखावट के विभिन्न प्रकार:

घुमावदार, नुकीली, सजावट वाली (माला के रूप में) आदि। घुमावदार लिखावट वाला व्यक्ति आध्यात्मिक स्वतंत्र विचारधारा, और बौद्धिक क्षमता वाला प्रभावशाली और समाज में प्रतिष्ठित होता है। माला सदृश लिखावट वाले लोग सहज, खुले विचारों वाले, सामाजिक और लापरवाह होते हैं। नुकीली हो तो व्यक्ति तनावग्रस्त, रहता है, उसमें प्रशासन की क्षमता और उसकी बोली में कड़क होती है। शब्दों के प्रकार, लिखावट में विभिन्नता, शब्दों के बीच की दूरियां, दबाव, गति, हस्ताक्षर सभी व्यक्ति की क्षमता बताते हैं। यहां उनका संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत है। अक्षर सटे हों तो व्यक्ति भुलक्कड़, चिडचिड़ा, संकीर्ण विचार और कम बोलने वाला होता है और तनावग्रस्त रहता है। जिनकी लिखावट में शब्दों के बीच की दूरी कम होती है वे अंतर्मुखी, मितव्ययी और एकांतवासी होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के मित्र कम होते हैं। इसके विपरीत यदि दूरी अधिक हो तो व्यक्ति उदारवादी, अपव्ययी और हंसमुख होते हैं।दबाव:

कम दबाव वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर, वाद-विवाद से कतराने वाला, लापरवाह और अस्थिर होता है। अधिक दबाव वाले कुंठित होने के कारण रोग ग्रस्त होते हैं। वे खाने-पीने के शौकीन, नेतृत्व करने की क्षमता वाले और महत्वाकांक्षी होते हैं। कम दबाव वाले पतले अक्षर वाला व्यक्ति शांत स्वभाव, कुशल, बौद्धिक क्षमता से युक्त और आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है। यदि दबाव बिल्कुल न हो तो दूसरों का पीड़ा पहुंचाता है। सूक्ष्म लिखावट वाले लोगों में एकाग्रता और प्रशासनिक क्षमता अधिक होती है। यदि बड़ी लिखावट हो तो दबंग, आशावादी और औसत लिखावट हो तो हमेशा सजग और स्थिर होते हैं। लिखावट सामान्य गति की हो तो व्यक्ति में एकाग्रता एवं कार्य को सोच विचार कर करने की क्षमता होती है। यदि गति अधिक हो तो निर्णय लेने की क्षमता अधिक किंतु स्वभाव में उतावलापन रहता है। ऐसे लोग अति महत्वाकांक्षी होते हैं। धीरे-धीरे लिखने वाले शंकालु एवं आलसी प्रवृत्ति के, गंभीर, दार्शनिक एवं विचारक होते हैं। इसके अतिरिक्त लिखावट से व्यक्ति की मानसिकता, सामाजिकता और शारीरिक क्षमता का अध्ययन कर सकते हैं। आपके हस्ताक्षर क्या कहते हैं

आइए जानें-

लिखावट एवं हस्ताक्षर दोनों अलग-अलग प्रकृति के होते हैं। हस्ताक्षर ऊपर की ओर चढ़ते हुए हांे तो व्यक्ति आशावादी, प्रगतिशील और नीचे की ओर हों तो निराशावादी और बेचैन होता है। हस्ताक्षर सीधे और स्पष्ट हांे तो व्यक्ति मिलनसार होता है। लिखावट से हस्ताक्षर बड़े हों तो व्यक्ति अहंकारी एवं आत्मप्रशंसी होता है। हस्ताक्षर से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं। हस्ताक्षर का प्रथम अक्षर बड़ा हो तो व्यक्ति कुल का नाम रोशन करने वाला, विलक्षण प्रतिभा का धनी, विद्वान और लोकप्रिय होता है। छोटे एवं अस्पष्ट हस्ताक्षर वाले गलत तरीके से धन कमाते हैं। वे तेज और चालाक होते हैं और दूसरों को नुकसान पहुंचाने में नहीं हिचकते। यदि शब्दों को तोड़-फोड़ कर लिखते हैं तो दूसरों को नुकसान और स्वयं को लाभ पहुंचाते हैं। वे अपराध जगत से जुड़े रहते हैं। हस्ताक्षर का प्रथम और उपनाम का पहला अक्षर बड़ा लिखते हांे तो समाज में लोकप्रिय होते हैं। 

वे सिद्धांतों को महत्व देते हैं। हस्ताक्षर के नीचे लकीर खींचने वाले लोग अपने कार्य के प्रति सजग रहते हैं। वे भावुक होते हैं। हस्ताक्षर का प्रथम अक्षर सांकेतिक एवं उपनाम पूर्ण लिखते हों तो भाग्यवान और ईश्वरवादी होते हैं। उनका वैवाहिक जीवन उत्तम होता है और जीवन की प्रत्येक कामना पूर्ण होती है। हस्ताक्षर स्पष्ट हों एवं उनके नीचे लकीर हो और अंत में बिंदू हांे तो लोग दिल के साफ, समाज में सम्मानित और सामाजिक होते हैं। उपर्युक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यदि लिखावट एवं हस्ताक्षर को संतुलित कर लें तो जीवन सुखमय होगा एवं मानसिक, शारीरिक तथा आर्थिक स्थिति सृदृढ़ होगी।

लेखन की शुरुआत:-

हैंडराइटिंग के इतिहास को लेकर लोगों के अपने-अपने मत हैं। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत 3,300 ईसा पूर्व मेसोपोटामिया में हुई थी। उस समय किसी आदमी ने मिट्टी के बोर्ड पर राशन का रिकॉर्ड रखने के लिए पहली बार लिखा था। ब्रिटेन के एक म्यूजियम में इस बोर्ड को आज तक संभालकर रखा गया है। वहीं कुछ शोधकर्ताओं का ये भी मानना है कि 60,000 से 25,000 ईसा पूर्व आदमी हड्डियों और पत्थरों पर आड़ी-तिरछी लाइनें खींचा करता था, ठीक उसी तरह जिस तरह तुम लोग क्लास में बोर होते समय अपनी कॉपी में खींचते रहते हो। इसकी भी एक मजेदार कहानी है। पुराने समय में जब लोग जहाज लेकर जाते थे तो उस टापू की पहचान के लिए उसके पत्थरों पर बड़ी-बड़ी लकीरें खींच देते थे जिससे कोई और जहाज और उसके कर्मचारी वहां अपना ठिकाना न बनाएं।

व्यक्तित्व का आइना होती है हैंडराइटिंग:-

कहते हैं हैंडराइटिंग व्यक्तित्व का आइना होते हंै। आपकी लिखावट इस बात को आसानी से बता सकती है कि वाकई आप क्या हैं। व्यक्ति के रहन-सहन, आदतें, व्यवहार, विचारधारा एवं जीवन मूल्यों के संबंध में हैंडराइटिंग के जरिए आसानी से जाना जा सकता है। यही वजह है कि आजकल बड़ी-बड़ी कंपनियों में हैंडराइटिंग एक्सपटर््स को रखा जाता है, ताकि एम्प्लाईज् की नियुक्ति ठीक-ठाक तरीके से हो सके। विशाखापत्तनम् में हैंडराइटिंग एनालिसिस इंडिया के अध्यक्ष मणिकांत का कहना है कि हम किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में जानकर यह तय कर सकते हैं कि वह कैसा है। किसी व्यक्ति की लिखावट उसकी पर्सनालिटी और चरित्र के बारे में सब बताती है। वह कैसे लिखता है, कितना दबा-दबाकर लिखता है, अक्षर किस ओर झुके होते हैं, उनका आकार कैसा होता है, हाशिया कितना छोड़ता है, इन सभी से पता चलता है कि उसके व्यक्तित्व की क्या विशेषताएं हैं। उनका कहना है कि ग्रैफोलॉजी 90 से 95 प्रतिशत की एक्युरेसी का दावा करता है।

*सब कुछ जाना जा सकता है :

भले ही लोग इस बात को मजाक समझे मगर यह सच है कि राइटिंग व्यक्ति का कॉन्फिडेंस लेवल, इंसपिरेशनल लेवल सब कुछ आसानी से बता सकती है। यही वजह है कि आजकल ग्रैफोलॉजी की मदद से रिलेशनशिप और वैवाहिक काउंसलिंग भी की जा रही है। केवल इतना ही नहीं बच्चों के विकास और जीवनसाथी को चुनने में भी ग्रैफोलॉजी काफी हद तक मदद करती है।

*इलाज में भी मददगार :-

कई प्रसिद्ध ग्रैफोलॉजिस्ट का कहना है कि ग्रैफोथैरेपी विज्ञान का एक नायाब तरीका है। यह लोगों के इलाज में भी मदद कर सकती है। इसकी मदद से व्यक्ति के बारे में जानकर उसके नेगेटिव बिहेवियर को भी सुधारा जा सकता है। 

कैसे जाना जा सकता है:-

अक्षरों का ऊपर से टूटा हुआ होना बताता है कि व्यक्ति के शरीर के ऊपरी भाग में कोई बड़ी बीमारी अपनी जगह बना रही है
व्यक्ति की लिखावट का मध्य भाग यदि औसत आकार का है, तो वह व्यक्ति साधारण है और मानसिक रूप से संतुलित है। 
लिखावट में यदि मध्य भाग के अक्षर छोटे-बड़े आकार में लिखे गए हैं, तो यह समझना चाहिए कि उसकी निर्णय लेने की क्षमता ठीक नहीं है। 
लिखावट में अक्षरों का निचला भाग व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव को बताता है तथा इस बात का भी सूचक है कि वह अपनी निजी जिंदगी में कितनी रूचि लेता है। 
लिखावट में निचले भाग में लिखे गए अक्षर यदि नुकीले हैं तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव में कोई बड़ा अवरोध है। 

हर किसी के अक्षरों में भिन्नाता:-

जैसे किन्हीं भी दो लोगों का व्यक्तित्व एक-दूसरे से भिन्ना होता है वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति की लिखावट भी एक-दूसरे से भिन्ना होती है। इसलिए इसके जरिए व्यक्ति का नेचर जानने में आसानी होती है। लिखावट में न तो भाषा का कोई महत्व है और न ही शब्दों का। लिखावट की बनावट ही सबकुछ होती है। हर लिखावट में कुछ विशेषता होती है जिसके कारण वह अन्य लिखावटों से भिन्ना दिखाई देती है। 

सुधार भी किया जा सकता है :-

केवल इतना ही नहीं लिखावट में सुधार भी किया जा सकता है। तभी तो छोटे बच्चों को प्रारंभ से ही पाठ नकल करने के लिए कहा जाता है ताकि वे लगातार प्रैक्टिस से अपनी राइटिंग में सुधार करें। राइटिंग के सुधरने का असर व्यक्ति के स्वभाव पर भी आसानी से देखा जा सकता है।

हस्ताक्षर या लिखावट का सीधा संबंध

हस्ताक्षर या लिखावट का सीधा संबंध हमारी सोच से होता है यानी हम जो सोचते हैं, करते हैं, जो व्यवहार में लाते हैं, वह सब कागज पर अपनी लिखावट व हस्ताक्षर के द्वारा दिखा देते हैं। हस्ताक्षर हमारे व्यवहार, समय, जीवन और चरित्र का आइना है। किसी के हस्ताक्षर को देखकर हम जान सकते हैं की जीवन के प्रति उसकी क्या सोच और दूसरों के प्रति उसका कैसा व्यवहार है। आइए हस्ताक्षर विज्ञान के नियमों से लोगों की पर्सनैलिटी को समझने का प्रयास करें... 
जो लोग बिना पेन उठाए एक ही बार में पूरा हस्ताक्षर करते हैं वह रहस्यवादी, लडाकु और गुप्त प्रवृत्ति वाले होते हैं।

जो व्यक्ति हस्ताक्षर में अक्षर नीचे से ऊपर की ओर जाते हैं तो वह ईश्वर पर आस्था रखने एवं आशावादी और साफ दिल के रहते हैं, लेकिन इनका स्वभाव झगडालू रहता है।

ऊपर से नीचे की ओर हस्ताक्षर करने वाले लोग नकारात्मक विचारों वाले एवं अव्यावहारिक होते हैं। इनकी मित्रता कम लोगों से रहती है।
जो व्यक्ति अंत में डॉट या डैश लगाते हैं वह डरपोक, शर्मीले और शक्की प्रवृत्ति के होते हैं।

जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर इस प्रकार से लिखता है जो काफी अस्पष्ट होते हैं तथा जल्दी-जल्दी लिखे गये होते हैं, वह व्यक्ति जीवन को सामान्य रूप से नहीं जीता। उसे हर समय ऊँचाई पर पहुँचने की ललक लगी रहती है। यह व्यक्ति घोखा दे सकता है पर घोखा खा नहीं सकता।
पेन पर जोर देकर लिखने वाले भावुक, उत्तेजक, हठी और स्पष्टवादी होते हैं।
जल्दी से हस्ताक्षर करने वाले कार्य को गति से हल करने व तीव्र तात्कालिक बुद्धि वाले होते हैं।
अवरोधक चिह्न लगाने वाले व्यक्ति हीनता का शिकार होते हैं। सामाजिकता व नैतिकता की दुहाई देते हैं और आलसी प्रवृत्ति के होते हैं।
जिस व्यक्ति के हस्ताक्षर में अक्षर काफी छोटे और तोड़-मरोड़ कर खिलवाड़ करके बनाए गए हों और हस्ताक्षर बिल्कुल पढ़ने में नहीं आते, वह व्यक्ति बहुत ही धूर्त और चालाक होता है। वह अपने फायदे के लिए किसी का भी नुकसान करने और नुकसान पहुंचाने से नहीं चूकता।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के नीचे दो लकीरें खींचता है, वह भावुक होता है, पूरी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता, मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर होता है और उसके जीवन में असुरक्षा की भावना रहती है। ऐसा व्यक्ति थोडा कंजूस स्वभाव का होता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर में नाम का पहला अक्षर सांकेतिक रूप में तथा उपनाम पूरा लिखता है और हस्ताक्षर के नीचे बिंदु लगाता है, वह मृदुभाषी और व्यवहार कुशल होता है। ईश्वरवादी होने के कारण उसे किसी भी प्रकार की लालसा नहीं सताती।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के अंतिम शब्द के नीचे बिंदु रखता है, वह विलक्षण प्रतिभा का धनी होता है। ऐसा व्यक्ति जिस क्षेत्र में जाता है, काफी प्रसिद्धि प्राप्त करता है और ऐसे व्यक्ति से बड़े-बड़े लोग सहयोग लेने को उत्सुक रहते हैं।
जो अपने हस्ताक्षर स्पष्ट लिखते हैं तथा हस्ताक्षर के अंतिम शब्द की लकीर, या मात्रा को इस प्रकार खींच देते हैं, जो ऊपर की तरफ जाती हुई दिखाई देती है, ऐसे व्यक्ति दिल के बहुत साफ होते हैं और हरेक के साथ सहयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। वे मिलनसार, मृदुभाषी, समाजसेवक, परोपकारी होते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी किसी का बुरा नहीं सोचते।
जिन लोगों के दस्तखत के अक्षर ऊपर की तरफ जाते हैं, उनका स्वभाव महत्वाकांक्षी तथा उत्साही होता है। यह व्यक्ति सकारात्मक दृष्टि रखने वाले होते हैं।