Jupiter Planet in Hindi :- 

दोस्तों अगर आप सौर मंडल या फिर विज्ञानं के बारे में थोड़ी से भी रुची रखते हैं तो आप यह तो जानते होंगे के पृथ्वी के आसपास हर रोज कई उल्का पिंड और धूमकेतु गुजरते हैं। परन्तु इसके बावजूद भी यह उल्का पिंड पृथ्वी से नहीं टकराते हैं। क्या आपके दिमाग यह आया है के ऐसा क्यों होता है ? आखिरकार वो कौनसी शक्ति है यो लाखों – करोड़ों वर्षों से उल्का पिंड और धूमकेतु को पृथ्वी के टकराने से बचाती है। यह हमारे सौर मंडल का एक बहुत बड़ा रहस्य है। तो चलिए आज हम आपको बताते है के ऐसा क्यों होता है।


Jupiter Planet


1. आज हम आपको ऐसे ग्रह के बारे में बताएगे जिसे हमारे सौर मंडल का ‘वकुएम क्लीनर’ कहा जाता है। यह ग्रह पृथ्वी को विनाशकारी हमलों से बचाता है जिसके कारण हम सुरक्षित जीवन जी रहे हैं और उस ग्रह का नाम है जुपिटर यानी के ब्रह्स्पति ग्रह।

2. जुपिटर (Jupiter) हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा और सबसे भारी ग्रह है। जुपिटर को सौर मंडल का रक्षा कवच भी कहा जाता है। हालांकि गैस के बादलों से ढके इस ग्रह के बारे में इंसान की समझ कुछ ज्यादा नहीं रही है।
3. जुपिटर ग्रह (Jupiter Planet) का आकार 1300 प्रिथ्वयों के समान है , जुपिटर ग्रह का वजन सौर मंडल के सारे ग्रहों के कुल वजन से ढाई गुना ज्यादा है।
4. जुपिटर ग्रह पर दिन बाकी सभी ग्रहों से छोटा होता है जुपिटर 9 घंटे 55 मिनट में अपनी धुरी के समक्ष एक चक्कर पूरा करता है।
5. ब्रहस्पति ग्रह की कोई जमीन नहीं है यह पूरी तरह गैस के बादलों से बना हुआ ग्रह है।
6. जुपिटर ग्रह ( Jupiter Planet ) की कोर यानी के इसके केन्द्रीय हिस्से के बारे में कहा जाता है के यह चटानो से बना हुआ है।
7. जुपिटर ग्रह के लगभग 67 चन्द्रमा हैं और इसमें से 4 चार बड़े चन्द्र्मायों की खोज सन 1610 में गैलिलिया ने की थी।
8. जुपिटर ग्रह सबसे पुराने ग्रहों में से एक है जुपिटर के जरिये पृथ्वी की उत्पति के बारे में पता लगाया जा सकता है।
9. जुपिटर ग्रह की सतह का औसतन तापमान 180 डिग्री सेल्सियस है ।
10. अब तक पृथ्वी से जुपिटर ग्रह पर 9 यान भेजे या चुके हैं।
• सन 1973 पायोनीयर 10 भेजा गया .
• 1974 पायनियर 11
• 1979 वॉयजर 1 और 2
• 1992 में यूलेसिस
• गैलेलियो 1995
• 2000 में कैसिनी
• 2007 में न्यू होराइजन्स
• 5 अगस्त 2011 जूनो

यह सभी जुपिटर ग्रह के पास से गुजरे थे ।

11. 8 दिसम्बर 1995 में जुपिटर की कक्षा में पहुँचने वाला पहला यान गैलिलियो था यो 2003 तक जुपिटर की कक्षा के चक्कर लगाता रहा।
12. परन्तु अब पहली बार नासा का यान ‘जूनो’ जुपिटर को बड़ी करीव से देखेगा। जूनो जुपिटर के बादलों के आर – पार देखने में समक्ष होगा। जूनो को नासा के द्वारा 5 अगस्त 2011 को अन्तरिक्ष में छोड़ा गया। परन्तु आपको यह जानकार हैरानी होगी के लगभग आधा सफ़र तय करने के बाद अक्टूबर 2013 में जूनो नाम का यह अन्तरिक्ष यान पृथ्वी की तरफ़ लौट आया था यह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी बल्कि यह तो वैज्ञानिक ढंग से इसकी गति बढ़ाने का तरीका था। जब जूनो पृथ्वी की तरफ़ लौट रहा था तब पृथ्वी की गुरुत्वा आकर्षण शकित ने जूनो को बड़ी तेज़ी से जुपिटर की तरफ़ धकेल दिया ऐसा करने से जूनो की स्पीड 14 हज़ार प्रति किलोमीटर के हिसाब से बड गई।
13. यूनो की औसतन रफ़्तार 38000 किलोमीटर प्रति घंटा है। परन्तु जुपिटर की कक्षा में पहुँचने पर इसकी गति 2 लाख 66 हजार प्रति किलोमीटर घंटा हो जाएगी। लगभग 35 मिनट तक अपने इंजन को जलाने के बाद जूनो अपनी गति को कम करेगा। गति कम होने के बाद जूनो जुपिटर की कक्षा को बांट लेगा और तकरीवन 20 महीनो तक जूनो जुपिटर के 37 चक्कर लगाएगा।
14. अब हम आपको यह भी बताते हैं के इस यान का नाम जूनो क्यों रखा गुया जूनो यूनान की एक देवी का नाम है जिसे जुपिटर की पत्नी माना जाता है। ग्रीक कथायों के मुताबिक जुपिटर नाम का देवता खुद को बादलों से ढक कर रखता है और जुपिटर की पत्नी जूनो ही बादलों के आर – पार देख सकती है।