Facts About Pluto Planet in Hindi – बौना ग्रह (प्लूटो ):-

• Pluto Planet – प्लूटो ग्रह को बौना ग्रह भी कहा जाता है। प्लूटो ग्रह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा दूसरा बौना ग्रह है। पहले प्लूटो को भी एक ग्रह घोषित किया गया था परन्तु बाद में 24 अगस्त 2006 को खगोल विज्ञानीयों ने इस ग्रह को ग्रहों की श्रेणी से निकाल दिया गया और इसे बौने ग्रह का नाम दिया गया।
Pluto Planet


• प्लूटो ग्रह यानी बौना ग्रह का व्यास लगभग 2370 किलोमीटर तक है।
• बौना ग्रह की सूर्य से दूरी 587 करोड़ 40 लाख किलोमीटर तक की है।
• बौना ग्रह पर एक साल धरती के दिनों के हिसाब से 248 दिनों का होता है। यह सूर्य की परिक्रमा 248 और अपनी धुरी पर 6 दिन 9 घंटों में एक चक्कर पूरा करता है।
• प्लूटो धरती के उपग्रह चन्द्रमा से भी छोटा है।
• जब यह ग्रह खोजा गया था तब इसे नौवां ग्रह माना गया था । परन्तु कुछ समय बाद इस पर कुछ एसी चीज़ें देखी गयी यो दुसरे ग्रहों से बिल्कुल भी नहीं मिलती थी जिसके कारन इसको ग्रहों की श्रेणी से निकालना पड़ा ।
• प्लूटो से पहले बुद्ध ग्रह को सबसे छोटा ग्रह माना गया था । प्लूटो ग्रह बुद्ध ग्रह के आधे से भी छोटा है ।
• प्लूटो कई रंगो का मिश्रण है इस तरह के रंगों का मिश्रण सौर मंडल के किसी भी ग्रह में नहीं पाया जाता हैं । प्लूटो पर रंगों का मिश्रण मौसम के बदलने के कारन होता है ।
• प्लूटो के पांच उपग्रह हैं प्लूटो का सबसे बड़ा उपग्रह शेरन है जो 1978 में खोजा गया था इसके बाद हायडरा और निक्स 2005 में खोजे गए । कर्बेरास 2011 में खोजा गया और सीटक्स 2012 में खोजा गया।
• बौना ग्रह पर अभी तक एक ही अन्तरिक्ष यान छोड़ा गया । ‘ न्यू हारिजांस ‘ 19 जनवरी 2006 को भेजा गया यो नौ सालों के बाद 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के पास से होकर गुजरा था।
• न्यू हारिजांस प्लूटो यानी बौना ग्रह और इसके सबसे बड़े उपग्रह शेरन के सबसे निकट से गुजरा था। उस वक्त यान की बौना ग्रह से दूरी तकरीवन 12500 किलोमीटर थी यह लगभग 14 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चल रहा था।
• प्लूटो का वायुमंडल बहुत ज्यादा पतला है जो मीथेन , नाईट्रोज़न और कार्बन मोनोऑक्साइड से बना है जिस समय प्लूटो परिक्रमा करते समय सूर्य ( sun ) से दूर चला जाता है तो इस पर ठंड बढ़ने लगती है और इस पर पाई जाने बाली गैसों का कुछ हिस्सा बर्फ़ बनकर उसकी सतह पर जम जाता है जिसके कारन प्लूटो का वायुमंडल और भी विरला ( पतला ) हो जाता है इस तरह जब प्लूटो धीरे – धीरे सूर्य के पास आने लगता है तो उन गैसों का कुछ हिस्सा पिघल कर वायुमंडल में फ़ैलने लगता है ।