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ज्योतिष-शास्त्र में ग्रहों, नक्षत्रों और राशि के अनुसार विभिन्न रत्नों को धारण करने की सलाह दी जाती है. वैसे तो आपके भाग्य में जो लिखा है वही होगा, लेकिन रत्नों को धारण करने से आप किसी विशेष गृह का प्रभाव कम या ज्यादा कर सकते हैं. एक रत्नों को धारण करने से आपका आत्म-विश्वास बढ़ जाता है और दूसरे इनको धारण करने से खूबसूरती भी बढ़ती है. संक्षेप में, आप इनको धारण करने के दोहरे फायदे हैं. हमेशा याद रखिये - "विश्वासको फलदायकः" अर्थात अगर आप विश्वास करेंगे तो आपको ज़रूर फायदा होगा, आप पूरे आत्म-विश्वास के साथ इन्हे धारण करें.किसी भी रत्न को धारण करते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि रत्न दाग वाला या टूटा हुआ न हो. वही रत्न फायदा देते हैं जिनमें कोई त्रुटि न हो. त्रुटियुक्त रत्न को धारण करने से रत्न का प्रभाव काम हो सकता है या उसका विपरीत परिणाम भी मिल सकता है. नकली रत्न पहनने से परिणाम भी मिले-जुले प्राप्त होते हैं. तो इस बात का ध्यान रखें की आप किसी प्रमाणित संस्थान से लें और किसी किस्म का हालमार्क या सर्टिफिकेट अवश्य लें.

रत्नों को बिना किसी ज्योतिषी के सलाह के न पहनें. सभी रत्न को धारण करने के कुछ तरीके होते हैं. ये तरीके आपके कुंडली के नक्षत्र, गृह-दशा और राशि पर निर्भर करता है.,परन्तु आपको अपने ज्योतिषी से मिलकर ही तरीकों पर अमल करना है.

गृह : बुद्धउंगली : अनामिकाधातु : सोनावजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
पन्ना गहरे हरे रंग का रत्न होता है. मुख्यतः इसे बुद्ध गृह के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए धारण किया जाता है. 
शुद्ध पन्ना को लकड़ी पर रगड़ने से विशेष चमक आती है. इस रत्न के ऊपर पानी रखने से पानी उसी प्रकार से ठहरता है जैसे हरे घास पर ठहरता है. 
पन्ना कीमती रत्न है इसलिए इसे खरीदते समय इसकी शुद्धता का ज़रूर पता कर लें.

विशेषताएं

इसे मिथुन और कन्या राशि के जातकों को मुख्य रुप से पहनने की सलाह दी जाती है.एकाग्रता को बढ़ाने और क्रोध पर नियंत्रण करने में पन्ना उपयोगी माना गया है.यह स्मरण शक्ति बढ़ाता है इसीलिये विद्यार्थियों को पन्ना पहनने से फायदा होता है.नवविवाहित लोगों या संतान की इच्छा करने वाले लोगों को पन्ना नहीं धारण करना चाहिए.

धारण करने की विधि

इसको पहनने से पहले आपने ज्योतिषी से बुद्ध गृह कि स्थिति का पता कर लें.इसको सोने की अंगूठी या पेन्डेन्ट के रूप में धारण कर सकते हैं.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : शुक्रउंगली : मध्यमाधातु : सोनावजन : 2 कैरटमन्त्र : ॐ ऐं जं गं ग्रहेश्वराय शुक्राय नमः॥

हीरा शुक्र गृह की पीड़ा से निवारण के लिए धारण किया जाता है. कहने की आवश्यकता नहीं कि हीरा बहुमूल्य रत्न है और इसको जितना बड़ा धारण किया जाय यह उतना लाभकारी होता है. 

इसको धारण करते समय इस बात का पूरा ज्ञान कर लें की कहीं से इसमें दरार या त्रुटि नहीं हो. चटके हुए रत्न अपना प्रभाव से ज्यादा दुष्प्रभाव देते हैं और बिलकुल धारण योग्य नहीं होते. शुद्धता की जांच तो अवश्य करा लें. 

हीरा वृषभ और तुला राशि वालों के लिए लाभकारी है.

विशेषताएं

हीरा व्यापार कला क्षेत्र के लोगों को धारण करना चाहिए.संबंधों में मधुरता लाने में हीरा लाभकारी है और मुख्य रूप से प्रेम-संबंधों में. ज्योतिष तो एक जगह है, हीरा उपहार में दिया जाय तो ऐसे भी रिश्ते तो मधुर होंगे ही क्योकि आपने सुना ही होगा कि हीरा है ही सदा के लिए.शिक्षा के क्षेत्र में भी हीरा गुणकारी है.हीरा धारण करने वाले दीर्घायु होते हैं.मधुमेह और नेत्र रोगों में हीरा उपयोगी है.

धारण करने की विधि

हीरा शुक्रवार को धारण करना चाहिए.हीरा सोने के अंगूठी या पेन्डेन्ट के रूप में पहन सकते हैं.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : चन्द्रमाउंगली : कनिष्ठाधातु : चाँदीवजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः॥

मोती सफेद रंग का समुद्र या नदियों से घोंघो से पाया जाता है. अन्य रत्नों की तुलना में मोती कम समय में खराब हो जाता है. खरीदते समय इसकी शुद्धता का ज़रूर पता कर लें. 

मोती एक लाभकारी रत्न है और जिन लोगों को अपनी कुंडली या जन्म-तिथि नहीं पता हो वो भी मोती धारण कर सकते हैं. 

इसे कर्क राशि के जातकों को मुख्य रुप से पहनने की सलाह दी जाती है.

विशेषताएं

चंद्रमा के प्रकोप से बचने के लिए मोती उपयोगी माना गया है.मोती अत्म-विश्वास बढ़ाता है. जब आप किसी भी कार्य को आत्म-विश्वास के साथ करते हैं तो आप सफलता की नहीं, सफलता आपका पीछा करती है.मोती धारण करने से आपकी मानसिक शांति बनी रहती है और व्यर्थ की चिंताओं से बचते हैं.इसको हृदय, नेत्र से संबंधित रोगों में भी गुणकारी माना जाता है.

धारण करने की विधि

इसको पहनने से पहले आपने ज्योतिषी से चंद्रमा कि स्थिति का पता कर लें.इसे सोमवार को पहनना चाहिए. इसको चाँदी की अंगूठी या पेंडेंट के रुप में धारण करें.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : वृहस्पतिउंगली : तर्जनीधातु : सोनावजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रीं ठः ऐं ठः श्रीं ठः स्वाहा॥

पुखराज पीले रंग का होता है. पुखराज को वृहस्पति गृह का रत्न मना जाता है. 

इसको धारण करने से पहले ज्योतिषी से अवश्य मिलें. 

अच्छे परिणाम के लिए पुखराज का शुद्ध होना बहुत आवश्यक है. 

पुखराज मीन और वृश्चिक राशि के जातकों को मूलतः पहनने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा वृहस्पति कमज़ोर होने पर पुखराज बेहद उपयोगी है. 

विशेषताएं

पुखराज धन-सम्पदा और ख्याति प्रदान करता है.शिक्षा या कला के क्षेत्र में सफलता प्रति के लिए पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है.पुखराज मानसिक शांति देता है और एकाग्रता बनाये रखने बेहद उपयोगी है.पुखराज आपको आस्तिक और धार्मिक बनता है.जिन लोगों को साँस या फेफड़े से सम्बंधित समस्या है, पुखराज उनके लिए उपयोगी साबित होता है.

धारण करने की विधि

पुखराज वृहस्पतिवार को पहनें. इसको पहनने से पहले पीले वस्तु का दान करें.इसको सोने की अंगूठी या पेंडेंट के रुप में धारण करें.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : सूर्यउंगली : अनामिकाधातु : सोनावजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ ह्सौः श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा॥

माणिक्य लाल रंग का रत्न होता है. माणिक्य मूलतः सूर्य के प्रकोप से बचने के लिए पहनने की सलाह दी जाती है. 

माणिक्य के बारे में यह धरना है कि यदि आप के ऊपर कोई बड़ी विपत्ति आने वाली हो तो माणिक्य अपना रंग बदल लेता है जिससे आप आने वाली विपत्ति को भांप जाते हैं. 

माणिक्य खरीदते समय इसकी शुद्धता अवश्य परख लें.

विशेषताएं

आत्मविश्वास की कमी, डिप्रेशन या किसी कार्य को करने में भय में भी माणिक्य का अच्छा उपयोग है.इसको धारण करने वाला बड़ी बदनामी से बच जाता है.माणिक्य हृदय रोग और सिरदर्द जैसे समस्याओं के लिए लाभकारी होता है.

धारण करने की विधि

माणिक्य को रविवार के दिन धारण करना चाहिए. किसी ज्योतिषी से मिलकर कुंडली का सही से विश्लेषण कराने के बाद ही धारण करें.शुद्ध माणिक्य को सोने या तांबे की अंगूठी के रूप में पहन सकते हैं. ज्योतिषी से यह जरूर पता कर लें कि कितने रत्ती का पहन सकते हैं.इसको

गृह : मंगलउंगली : अनामिकाधातु : चाँदीवजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥

मूंगा गहरे नारंगी रंग का रत्न है. इसको मंगल गृह का दोष निवारण के लिए जाना जाता है. मूंगा एक प्रकार की वनस्पति या शैवाल है जो समुद्र में पाया जाता है. इसको जितने गहरे समुद्र से निकला जाता है, यह उतना ही हलके रंग का होता जाता है. 

माणिक्य के बारे में यह धरना है कि यदि आप के ऊपर कोई बड़ी विपत्ति आने वाली हो तो माणिक्य अपना रंग बदल लेता है जिससे आप आने वाली विपत्ति को भांप जाते हैं. 

माणिक्य खरीदते समय इसकी शुद्धता अवश्य परख लें. 

विशेषताएं

मूंगा धारण करने से किसी की नज़र नहीं लगती और किसी किस्म की प्रेत-बाधा का भी डर नहीं रहता.मूंगा आत्म-बिश्वास बढ़ता है और आपको देखने का लोगों का नजरिया बदल जाता है और आप सम्माननीय बन जाते है.किसी के जलन से आप पर कोई असर नहीं होता.ह्रदय-रोग से ग्रसित लोग मूंगा पहने तो उन्हें ज़रूर फायदा होता है.इसका मिर्गी और पीलिया में अच्छा प्रभाव पाया गया है.

धारण करने की विधि

मूंगा पहनने से पहले किसी ज्योतिषी से अवश्य सलाह लेें.मूंगा मंगलवार को अनामिका में धारण करने की सलाह दी जाती है. इसको चाँदी के अंगूठी या पेन्डेन्ट के रूप में पहन सकते हैं.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : केतुउंगली : मध्यमाधातु : सोनावजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥

लहसुनिया को केतु का रत्न माना गया है. इसको कैट्स आई भी कहा जाता है और देखने पर भी यह बिल्ली की आँख जैसा दिखता है. 

मुख्यतः इसे केतु गृह के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए धारण किया जाता है. 

इसको धारण करते समय इसकी शुद्धता का परीक्षण अवश्य कर लें. शुद्ध लहसुनिया आपको मुश्किलों को कम कर सकता और गलत लहसुनिया आपको उसके विपरीत मुश्किलों में डाल सकता है. 

विशेषताएं

लहसुनिया धारण करने से दुख:-दरिद्रता समाप्त हो जाता है.यह रत्न भूत बाधा तथा काले जादू से दूर रखने में साहयक माना जाता है.इसको धारण करने से आप ऊर्जावान महसूस करते है और शारीरिक दुर्बलता कम हो जाती है.

धारण करने की विधि

लहसुनिया को सोमवार को पहनना चाहिए और आपके ज्योतिषी जिस विधि से पहनने को कहें, आप उनका पालन करें.इसको सोने की अंगूठी या पेन्डेन्ट के रूप में पहन सकते हैं.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : शनिउंगली : मध्यमाधातु : चाँदीवजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥

नीलम को ब्लू-सफायर भी कहा जाता है. नीलम हीरे के बाद बहुमूल्य रत्न है. 

नीलम मुख्यतः शनि गृह की पीड़ा शांत करने के लिए धारण किया जाता है. कुम्भ और मकर राशि वालों के लिए नीलम धारण करना लाभकारी होता है. 

नीलम को धारण करने से पहले ज्योतिषी से अवश्य सलाह लें. इसका मुख्य कारण यह है कि नीलम सभी लोगों को फायदा नहीं देता. इसके धारण करने पर परिणाम इस पार या उस पार के हो सकते हैं अर्थात या तो बहुत सफलता और या फिर असफलता. धारण करने के बाद यदि परिणाम उलटे आएं तो इसे बिलकुल धारण न करें. 

शुद्ध नीलम दूध में डालने पर, दूध का रंग नीले रंग-सा हो जाता है. 

विशेषताएं

नीलम धारण करने से मानसिक शांति बानी रहती है. आप जल्दी बातों से तनावग्रस्त नहीं होते.नीलम धारण करने से शनि की साढ़ेसाती से भी राहत मिलता है.राजनेताओं और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए नीलम राम-वाण है.हड्डी से जुड़े रोगों या लकवा जैसे रोगों में इसको लाभकारी पाया गया है.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

धारण करने की विधि

नीलम को शनिवार को धारण किया जाता है. नीलम को चाँदी या प्लैटिनम के अंगूठी या पेन्डेन्ट के रूप में पहन सकते हैं.नीलम धारण करने से पहले अपने ज्योतिषी से अवश्य मिल लें. नीलम विशेष रत्न है और इसको हलके में लेने की भूल न करें। अगर नीलम से लाभ की जगह नुक्सान हो रहा हो तो तुरंत निकाल दें.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.

गृह : राहुउंगली : मध्यमाधातु : चाँदीवजन : 6.5 कैरटमन्त्र : ॐ क्रीं क्रीं हूं हूं टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥

गोमेद गाढ़े कत्थई रंग का रत्न है. गोमेद छाया गृह राहु के प्रकोप से बचने के लिए धारण करने की सलाह दी जाती है. 

गोमेद धारण करते समय इसके शुद्धता के जांच कर ले और इस बात की तसल्ली अवश्य कर ले कि रत्न में कोई दाग या त्रुटि न हो. 

विशेषताएं

गोमेद धारण करने से राहु के वजह से रुके हुए सभी कार्य सम्पादित होने लगते है.आपका आत्म-विश्वास बढ़ जाता है और आप अपने क्षेत्र सफलता प्राप्त करने लगते है.भ्रम की जो परिस्थिति आपके आगे बढ़ने में बाधा बनती है, उसका निराकरण हो जाता है.गोमेद श्वास या फेफड़े की समस्या या ह्रदय विकार के लिए भी उपयोगी माना जाता है.

धारण करने की विधि

यदि आप गोमेद की अंगूठी धारण करना चाहते हैं तो इसे मध्यमा उंगली में धारण करें. गोमेद को चाँदी के अंगूठी या पेन्डेन्ट में पहना जाता है.अपने ज्योतिषी से धारण करने की विधि अवश्य पूछ लें.इसको धारण करते समय ऊपर दिए मंत्र का जाप करे.